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मोहम्मद जकारिया अयाज / सम्पादक : संभल। उच्चतम न्यायालय ने शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद से जुड़े सर्वेक्षण आदेश के मामले में मंगलवार को अहम फैसला लेते हुए सुनवाई 18 अगस्त तक के लिए टाल दी। यह सुनवाई संभल जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की उन याचिकाओं पर होनी थी, जिनमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसने सर्वेक्षण के आदेश को सही ठहराया था।
पीठ को मिला स्थगन का पत्र
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से दो अलग-अलग याचिकाएं सुनवाई के लिए पेश हुईं। हालांकि, पीठ को स्थगन का अनुरोध करने वाला एक पत्र प्राप्त होने के बाद मामले को आगे की तारीख दे दी गई। इन याचिकाओं में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 19 मई, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें संभल की दीवानी अदालत के सर्वेक्षण निर्देश को वैध करार दिया गया था।
दिसंबर 2024 का आदेश बना आधार
शीर्ष अदालत ने 12 दिसंबर, 2024 को एक ऐतिहासिक आदेश में देशभर की अदालतों को निर्देश दिया था कि वे अगले आदेश तक धार्मिक स्थलों — विशेष रूप से मस्जिदों और दरगाहों — को पुनः प्राप्त करने की मांग वाली नई याचिकाओं पर सुनवाई न करें और न ही कोई अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करें। मस्जिद समिति का तर्क था कि इस आदेश के मद्देनज़र इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस मामले में आगे की कार्यवाही करने का अधिकार नहीं था।
पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश ‘पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’ के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया था। यह कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही रहेगा जैसा 15 अगस्त, 1947 को था और उसमें कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता।
अयोध्या विवाद था इस कानून से बाहर
उल्लेखनीय है कि 1991 के इस कानून के दायरे से अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को विशेष रूप से बाहर रखा गया था। इस अपवाद को लेकर समय-समय पर विभिन्न पक्षों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं।
उच्च न्यायालय ने दी थी सर्वेक्षण को हरी झंडी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि संभल की दीवानी अदालत द्वारा आयुक्त नियुक्त कर सर्वेक्षण कराने का आदेश पूरी तरह सुनवाई योग्य और वैध है। अब सभी की निगाहें 18 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।

