Statement Today News
अब्दुल बासिद खान / ब्यूरो मुख्यालय :
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की इस ऑडिट रिपोर्ट में बेंगलुरु मेट्रो परियोजना के पहले और दूसरे चरण में कई कमियां बताई गई हैं—खासकर योजना, भूमि अधिग्रहण, परियोजना क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन में। रिपोर्ट के अनुसार यात्रियों की संख्या का अनुमान जरूरत से ज्यादा लगाया गया, जिससे वित्तीय आकलन प्रभावित हुआ, और भूमि अधिग्रहण में देरी व गलत अनुमान के कारण लागत बहुत बढ़ गई ।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Phase 1 और 2 के लिए DPRs बिना पर्याप्त समग्र मोबिलिटी प्लान और भूमि-उपयोग नीति के तैयार किए गए थे, और वास्तविक ridership अनुमान से काफी कम रही । कुल मिलाकर, CAG ने परियोजना में योजना और कार्यान्वयन स्तर पर गंभीर कमजोरियां रेखांकित की हैं ।
नई दिल्ली। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने बेंगलुरु मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन पर सोमवार को संसद में प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट संख्या-7 (2026) पेश की। रिपोर्ट में परियोजना के पहले और दूसरे चरण की योजना, क्रियान्वयन, निगरानी और परिचालन से जुड़ी गंभीर चूकें सामने आई हैं।
क्या है BMRCL?
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMRCL) केंद्र सरकार और कर्नाटक राज्य सरकार का 50:50 संयुक्त उपक्रम है। चरण-1 का परिचालन अक्टूबर 2011 में शुरू हुआ और जून 2017 तक 42.30 किलोमीटर के पूरे नेटवर्क पर चालू हो गया। चरण-2 के अंतर्गत जनवरी 2021 से मार्च 2023 के बीच 27.36 किलोमीटर हिस्से पर आंशिक परिचालन शुरू किया गया, जबकि शेष भाग को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
बिना नींव के खड़ी हुई परियोजना
CAG ने पाया कि चरण-2 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बिना किसी व्यापक परिवहन योजना (CMP), ट्रांजिट आधारित विकास नीति (TOD) और भूमि उपयोग नीति (LUP) के तैयार की गई। अर्थात् जिस नींव पर पूरी परियोजना खड़ी की गई, वही अधूरी थी।
भूमि अधिग्रहण में अरबों का घालमेल
भूमि प्रबंधन के मोर्चे पर भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं —
| चरण | अनुमानित भूमि | वास्तव में अधिगृहित |
| चरण-1 | 45.24 हेक्टेयर | 62.67 हेक्टेयर |
| चरण-2 | 165.09 हेक्टेयर | 145.16 हेक्टेयर |
इससे भी गंभीर बात यह रही कि कृषि भूमि के लिए गैर-कृषि दरों पर मुआवजा दिया गया, या कृषि भूमि में ऐसी विशेषताएँ जोड़ी गईं जो केवल परिवर्तित (converted) भूमि पर लागू होती हैं। इस अनियमितता के चलते भूमि स्वामियों को 294.72 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो गया।
यात्री नहीं मिले, राजस्व भी डूबा
परियोजना का सबसे बड़ा संकट रहा — कम यात्री संख्या। चरण-1 में वर्ष 2021 में Peak Hour Peak Direction Traffic (PHPDT) महज 6,429 से 8,852 के बीच रही, जबकि अनुमान 15,000 से अधिक का था।
कैग के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
- BMTC (बस सेवा) के साथ समन्वय का अभाव
- अंतिम छोर तक संपर्क (Last Mile Connectivity) की कमी
- पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं का न होना
तथ्यों पर एक नजर
🔴 वास्तविक Farebox Revenue — ₹1,758.13 करोड़ (अनुमानित ₹7,736.70 करोड़ का मात्र 22.72%) 🔴 भूमि अधिग्रहण लागत में वृद्धि — ₹6,603.39 करोड़ 🔴 अत्यधिक मुआवजा भुगतान — ₹294.72 करोड़ 🔴 ऑडिट अवधि — परियोजना शुरुआत से मार्च 2021 तक (ठेकों की समीक्षा मार्च 2023 तक)
यह रिपोर्ट न केवल बेंगलुरु मेट्रो, बल्कि देश की अन्य मेट्रो परियोजनाओं के लिए भी एक चेतावनी है — कि बिना समग्र योजना, पारदर्शी भूमि अधिग्रहण और यात्री-केंद्रित सोच के, बड़े बुनियादी ढाँचे का सपना अधूरा रह जाता है।

