प्रवासी मज़दूर परिवारों में शिक्षा और पोषण की नई राह - आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जयलता की कहानी - statementtodaynews.com

प्रवासी मज़दूर परिवारों में शिक्षा और पोषण की नई राह – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जयलता की कहानी

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अब्दुल बासिद खान / ब्यूरो मुख्यालय : लखनऊ, प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार लीना जौहरी ने बताया कि  ग्रेटर नोएडा का तिलपता क्षेत्र प्रवासी मज़दूर परिवारों का प्रमुख ठिकाना है। इन परिवारों के माता-पिता रोज़गार की तलाश में सुबह से शाम तक मेहनत-मज़दूरी में जुटे रहते हैं। रोज़ी-रोटी की इस जद्दोजहद में बच्चों की परवरिश, पोषण, समय पर टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा जैसे पहलू अक्सर पीछे छूट जाते हैं। यही कारण था कि क्षेत्र के अधिकांश बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों से वंचित रह जाते और विद्यालय में प्रवेश के समय अन्य बच्चों की तुलना में पिछड़ जाते थे।

इसी चुनौती को गंभीरता से समझा आंगनवाड़ी कार्यकत्री जयलता (आयु – 42 वर्ष) ने। उन्होंने न केवल समस्या को पहचाना, बल्कि इसे हल करने के लिए ठोस कदम भी उठाए।

जयलता ने प्रवासी परिवारों तक पहुँचने का बीड़ा उठाया। वे घर-घर जाकर माता-पिता से संवाद करतीं और उन्हें समझातीं कि बच्चों का स्वास्थ्य और शिक्षा उनके भविष्य की बुनियाद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक शिक्षा ही आगे चलकर बच्चों के जीवन की दिशा तय करती है।

आंगनवाड़ी केंद्र पर उन्होंने बच्चों को आकर्षित करने के लिए कई रचनात्मक कदम उठाए। खेल-खेल में सीखने की गतिविधियाँ, कहानी सुनाना और गीत-संगीत जैसी विधियाँ बच्चों के बीच लोकप्रिय हुईं। स्थानीय व कम लागत वाले साधनों से शैक्षिक खेल और सामग्री तैयार की गईं, जिससे बच्चे सहज रूप से केंद्र से जुड़ने लगे।

इन निरंतर प्रयासों के परिणाम जल्द ही दिखने लगे। हर वर्ष 20-25 प्रवासी परिवारों के बच्चे आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ने लगे। बच्चों की नियमित उपस्थिति में वृद्धि हुई और उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। माता-पिता भी अब अपने बच्चों के पोषण, टीकाकरण और शिक्षा के प्रति सजग हो गए हैं। कई बच्चे अब पास के विद्यालयों में दाखिल होकर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह हुआ कि समुदाय में आंगनवाड़ी केंद्र और कार्यकर्ता के प्रति भरोसा बढ़ा है।

यह बदलाव किसी आश्चर्य से कम नहीं। यह एक कार्यकर्ता की संवेदनशीलता, समर्पण और निरंतर संवाद का परिणाम है।  जयलता ने यह साबित कर दिया कि यदि नीयत साफ़ हो और प्रयास निरंतर हों, तो समाज के सबसे वंचित वर्गों तक भी सकारात्मक परिवर्तन पहुँच सकता है। आज तिलपता का आंगनवाड़ी केंद्र केवल एक शैक्षिक केंद्र नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए विश्वास और प्रगति का प्रतीक बन चुका है।

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